जेन जी कौन हैं.डिजिटल पीढ़ी, Gen-Z

 

बागी नहीं, बदलाव का चेहरा हैं Gen-Z: जानिए क्या सोचती है यह नई पीढ़ी

आज जब भी युवाओं की बात होती है, तो एक शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है'Gen-Z' (जेन जी) कभी सोशल मीडिया पर उनके कंटेंट और रील्स को देखकर, तो कभी सड़कों पर उनके अधिकारों के आंदोलनों को देखकर यह सवाल उठता है कि आखिर यह नई पीढ़ी कौन है और बाकी पीढ़ियों से इतनी अलग क्यों है?

अक्सर पुरानी पीढ़ियों द्वारा Gen-Z को अधीर, विद्रोही या डिजिटल दुनिया में खोई हुई पीढ़ी मान लिया जाता है, लेकिन यह नजरिया अधूरा है। आइए, इस पीढ़ी की हकीकत, सोच और भारत के भविष्य पर इनके प्रभाव को आसान शब्दों में समझते हैं।

1. पीढ़ियों का गणित: कौन किस दौर का है ?

समाजशास्त्र के अनुसार, लगभग 15-20 वर्षों के अंतराल में जन्म लेने वाले लोगों को एक जनरेशन माना जाता है:

·         बेबी बूमर्स (1946–1964): द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जन्मी पारंपरिक पीढ़ी।

·         जनरेशन X (1965–1980): पारंपरिक और आधुनिक दौर के बीच संतुलन बनाने वाली पीढ़ी।

·         मिलेनियल्स / Gen-Y (1981–1996): इंटरनेट के आगमन और शुरुआती दौर को देखने वाली पीढ़ी।

·         Gen-Z / ज़ूमर्स (1997–2012): पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट युग में जन्मी-पली पीढ़ी।

·         जनरेशन अल्फा (2013 के बाद): AI और अत्यधिक स्मार्ट तकनीक के माहौल में बड़ी हो रही नई पीढ़ी।

2. कौन हैं Gen-Z और क्या हैं इनकी खूबियाँ?

Gen-Z (जन्म 1997 से 2012) को सही मायनों में 'डिजिटल नेटिव्स'  या स्क्रीन एजेड कहा जाता है। जहाँ मिलेनियल्स ने तकनीक को आते देखा, वहीं Gen-Z के लिए स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट जीवन की बुनियादी जरूरतें हैं।

इनकी प्रमुख विशेषताएँ:

·         तकनीक में माहिर: नई टेक्नोलॉजी और AI को बहुत तेजी से अपनाते हैं।

·         व्यावहारिक सोच: बैंक की लाइन में लगने के बजाय 2 सेकंड के UPI पेमेंट और स्क्रीनशॉट पर भरोसा करते हैं।

·         अलग करियर विकल्प: पारंपरिक 9-to-5 नौकरी के अलावा स्टार्टअप, फ्रीलांसिंग और कंटेंट क्रिएशन को चुनते हैं।

·         मानसिक स्वास्थ्य समानता: मेंटल हेल्थ, जेंडर इक्वैलिटी और विविधता (Diversity) पर खुलकर बात करते हैं।

·         पारदर्शिता पसंद: ब्रांड्स के नाम से ज्यादा उनके मूल्यों और काम करने के तरीकों को तवज्जो देते हैं।

3. काम और जीवन को लेकर अलग सोच

Gen-Z के लिए सफलता का मतलब सिर्फ एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी नहीं है। यह पीढ़ी:

1.      वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देती है।

2.      काम के साथ-साथ व्यक्तिगत संतुष्टि और मानसिक शांति चाहती है।

3.      जानकारी के लिए टीवी या अखबार के बजाय डिजिटल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा करती है।

एक दिलचस्प पहलूअध्यात्म से जुड़ाव:

आम धारणा के विपरीत, पूरी तरह आधुनिक होने के बावजूद Gen-Z में अध्यात्म (Spirituality) की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। मिलेनियल्स ने जिस अध्यात्म का सिरा पकड़ा था, Gen-Z उसे अपने नए और मॉडर्न तरीके से पुनर्जीवित कर रही है।

4. सोशल मीडिया के पीछे की असल चिंताएँ

सोशल मीडिया पर मुस्कुराते चेहरों के पीछे इस पीढ़ी की अपनी चुनौतियाँ भी हैं। हालिया सर्वे बताते हैं कि Gen-Z काफी व्यावहारिक और जिम्मेदार है। उनकी सबसे बड़ी चिंताएँ हैं:

·         परिवार की सेहत और सुरक्षा

·         भविष्य की आर्थिक सुरक्षा

·         पर्सनल रिलेशनशिप और मेंटल हेल्थ

जहाँ मिलेनियल्स पर्यावरण और वैश्विक-सामाजिक मुद्दों को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं, वहीं Gen-Z की चिंताएँ अपने परिवार, करियर और मानसिक स्वास्थ्य जैसे व्यक्तिगत मुद्दों से अधिक जुड़ी हैं।

5. बागी नहीं, बदलाव के वाहक

भारत में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की आबादी लगभग 37.5 करोड़ है, जो दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी है। हालिया समय में नीट (NEET) जैसे सामाजिक शैक्षणिक मुद्दों पर युवाओं का संगठित होना यह दिखाता है कि यह पीढ़ी सही के लिए सवाल पूछना जानती है।

किसी भी आंदोलन या विरोध को देखकर इन्हें 'एंटी-नेशनल' या 'विद्रोही' कहना गलत है।

निष्कर्ष

Gen-Z को पुरानी सोच के चश्मे से देखना बंद करना होगा। यह पीढ़ी भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहकर वैश्विक स्तर पर देश को आगे ले जाने की क्षमता रखती है। इस दशक के अंत तक Gen-Z और मिलेनियल्स मिलकर देश की आधी आबादी होंगे। इसलिए इस पीढ़ी की आकांक्षाओं और सोच को समझना वास्तव में भारत के भविष्य को समझने जैसा है।

  

 

जेन जी कौन हैं.डिजिटल पीढ़ी, Gen -Z
Courtesy -Google




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